आकाशगंगा समूहों के एक्स-रे सर्वेक्षण से खगोलविदों ने निकटवर्ती ब्रह्मांड में Quipu महा-संरचना की पहचान की है। इसकी आकृति गाँठों वाली लंबी डोर जैसी है और इसके सबसे दूर-दूर स्थित सदस्यों के बीच लगभग 1.4 अरब प्रकाश-वर्ष का अंतर है। पदार्थ का ऐसा विशाल जमाव ब्रह्मांड के विस्तार और माइक्रोवेव पृष्ठभूमि के सटीक मापों को भी प्रभावित करता है।

मुख्य बातें

  • Quipu में 68 आकाशगंगा समूह हैं। सदस्यों के बीच अधिकतम दूरी 428 Mpc, लगभग 1.4 अरब प्रकाश-वर्ष, है। इसका अनुमानित कुल द्रव्यमान लगभग 2.4 × 10¹⁷ सौर द्रव्यमान है।
  • अध्ययन में ROSAT के एक्स-रे आँकड़ों से समूहों का मानचित्र बनाकर उसकी तुलना आकाशगंगाओं के वितरण और ब्रह्मांडीय सिमुलेशन से की गई है।
  • महा-संरचनाएँ विस्तार और माइक्रोवेव पृष्ठभूमि के सटीक मापों को प्रभावित कर सकती हैं; इस अध्ययन में खोजे गए माइक्रोवेव संकेत की सांख्यिकीय सार्थकता अभी कम है।

निकटवर्ती ब्रह्मांड के आकाशगंगा समूहों के मानचित्र में एक विशाल, शाखाओं वाला जाल उत्तरी आकाश से दक्षिणी आकाश तक फैला दिखाई देता है। 2025 में प्रकाशित अध्ययन में Hans Böhringer और उनके सहयोगियों ने 68 समूहों वाली इस महा-संरचना का नाम Quipu रखा। इसके सबसे दूर-दूर स्थित दो सदस्य 428 मेगापारसेक (Mpc), लगभग 1.4 अरब प्रकाश-वर्ष, के अंतर पर हैं। यह इस सर्वेक्षण में मिली सबसे बड़ी संरचना है।

शाखाओं वाली ब्रह्मांडीय डोर

तीन आयामों में Quipu की एक लंबी, मुड़ी हुई मुख्य धुरी दिखती है, जिससे छोटी शाखाएँ निकलती हैं। Quipu उन गाँठों वाली डोरियों को कहा जाता है जिनसे इंका लोग जानकारी दर्ज करते थे। यह नाम जाल की आकृति को दर्शाता है और चिली में हुए उन प्रेक्षणों की याद भी दिलाता है जिनसे अनेक समूहों के रेडशिफ्ट मिले थे।

यहाँ हर 'गाँठ' अनेक आकाशगंगाओं वाला एक समूह है। शोधपत्र के 428 Mpc सदस्यों के बीच सबसे लंबी सीधी दूरी हैं, जो उसमें स्लोन ग्रेट वॉल के लिए दिए गए 328 Mpc से अधिक है। इसलिए शोध संस्थान ने Quipu को उस समय विश्वसनीय रूप से मापी गई सबसे बड़ी ज्ञात ब्रह्मांडीय महा-संरचना बताया। यह तुलना इस बात पर निर्भर करती है कि अलग-अलग अध्ययन संरचनाओं की पहचान और मापन की सीमा कैसे तय करते हैं।

एक्स-रे समूहों से पदार्थ का पता लगाना

टीम ने CLASSIX सर्वेक्षण का उपयोग किया, जिसमें ROSAT उपग्रह के पूरे आकाश के एक्स-रे आँकड़ों से समूह खोजे जाते हैं और ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोस्कोपी से उनकी पहचान तथा रेडशिफ्ट की पुष्टि की जाती है। यह सूची लगभग 86% आकाश को समेटती है। इस अध्ययन का मुख्य क्षेत्र 0.03 से 0.06 रेडशिफ्ट, लगभग 130–250 Mpc दूरी, पर है; सीमाओं के पार जुड़े सदस्यों को भी शामिल किया गया।

आकाशगंगा समूह ब्रह्मांडीय जाल के सघन क्षेत्रों के संकेतक हैं। फ्रेंड्स-ऑफ-फ्रेंड्स एल्गोरिदम पर्याप्त नज़दीक समूहों को क्रमशः जोड़ता है और दूरी के साथ बदलते नमूना घनत्व के अनुसार जोड़ने की सीमा समायोजित करता है। 2MASS आकाशगंगाओं के रेडशिफ्ट आँकड़ों में भी संबंधित सघन क्षेत्र दिखते हैं, जिससे समूहों द्वारा उकेरी गई आकृति को एक और प्रेक्षणीय आधार मिलता है।

Quipu का अनुमानित कुल द्रव्यमान लगभग 2.4 × 10¹⁷ सौर द्रव्यमान है, जिसमें समूहों के आसपास पदार्थ का बड़े पैमाने का वितरण भी शामिल है। यह अनुमान समूहों के घनत्व से पदार्थ का घनत्व निकालकर उसे संरचना के निर्धारित आयतन के साथ जोड़ता है। इसलिए यह मॉडल और चुनी गई सीमाओं पर निर्भर है। इस तरह दिखने वाले संकेतकों से डार्क मैटर का वितरण समझा जाता है।

शोधपत्र का चित्र 4: पूरे आकाश के मानचित्र में Quipu लाल, अन्य चार महा-संरचनाएँ दूसरे रंगों और आकाशगंगाएँ छोटे हल्के बिंदुओं में दिखाई गई हैं
चित्र 4: लाल रंग Quipu को दर्शाता है; नीला, हरा, बैंगनी और नारंगी क्रमशः Shapley, Serpens–Corona Borealis, Hercules और Sculptor–Pegasus हैं। छोटे हल्के बिंदु उसी रेडशिफ्ट सीमा की 2MASS आकाशगंगाएँ हैं; धूसर वृत्त अन्य समूह हैं। स्रोत: Böhringer et al. (2025), A&A 695, A59. CC BY 4.0; केवल WebP में रूपांतरण, बिना काट-छाँट या रंग परिवर्तन के।

पाँच महा-संरचनाओं में कितना पदार्थ है?

Quipu के अलावा टीम ने चार और बड़ी महा-संरचनाएँ पहचानीं: Shapley, Serpens–Corona Borealis, Hercules और Sculptor–Pegasus। सर्वेक्षण और सिमुलेशन के संयुक्त विश्लेषण से लेखकों का अनुमान है कि अध्ययन क्षेत्र में ये संरचनाएँ लगभग 45% समूह, 30% आकाशगंगाएँ और 25% पदार्थ समेटती हैं तथा लगभग 13% आयतन घेरती हैं। ये अनुपात उस क्षेत्र की सभी महा-संरचनाओं के लिए हैं, केवल Quipu के लिए नहीं।

Millennium ब्रह्मांडीय सिमुलेशन में भी मिलती-जुलती संख्या और सदस्य वितरण वाली महा-संरचनाएँ बनती हैं। तुलना दिखाती है कि प्रेक्षित विशाल जाल ठंडे डार्क मैटर और ब्रह्मांडीय स्थिरांक वाले ΛCDM मॉडल में उभर सकते हैं। इनके विशिष्ट परिवेश से यह अध्ययन करने का अवसर मिलता है कि आसपास का पदार्थ आकाशगंगाओं को कैसे प्रभावित करता है।

यह डोर ब्रह्मांड के मापों को कैसे प्रभावित करती है

पदार्थ के इन जमावों का गुरुत्व आकाशगंगाओं को ब्रह्मांड के समग्र विस्तार के अतिरिक्त गति देता है। Shapley के आसपास के प्रवाह का उदाहरण लेकर शोधपत्र अनुमान लगाता है कि कुछ दिशाओं में हबल स्थिरांक के स्थानीय माप एक से कुछ प्रतिशत तक बदल सकते हैं। यह अनुमान बड़े पैमाने के परिवेश का प्रभाव समझाता है; सटीक सुधारों के लिए पदार्थ और वेग के अधिक पूर्ण मानचित्र चाहिए।

ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि का प्रकाश समय के साथ बदलते गुरुत्वीय विभव से गुजरते हुए तापमान में छोटे बदलाव प्राप्त कर सकता है। इसे समाकलित सैक्स–वोल्फ प्रभाव, या ISW, कहते हैं। अध्ययन के सरल मॉडल इन महा-संरचनाओं से लगभग 3–5 माइक्रोकेल्विन का संकेत अपेक्षित करते हैं। Planck के आँकड़ों में समान परिमाण मिलता है, पर सांख्यिकीय सार्थकता 1σ से कम है; पुष्टि के लिए अधिक निर्णायक प्रेक्षण चाहिए।

शोधपत्र का चित्र 5: Quipu के दो त्रिआयामी दृश्य, जिनमें रंगीन समूह-बिंदु मुख्य धुरी और शाखाओं पर हैं
चित्र 5: Quipu के दो त्रिआयामी दृश्य। बिंदु आकाशगंगा समूह हैं; उनका रंग और आकार हर दृश्य के बाहरी प्रेक्षक से दूरी दर्शाते हैं। महीन रेखाएँ एल्गोरिदम के संबंध दिखाती हैं। स्रोत: Böhringer et al. (2025), A&A 695, A59. CC BY 4.0; केवल WebP में रूपांतरण, बिना काट-छाँट या रंग परिवर्तन के।

डोर के सिरों का मानचित्र अभी अधूरा है

Quipu के कुछ किनारे ऐसे क्षेत्रों के पास हैं जहाँ आकाशगंगा का पर्दा पृष्ठभूमि की वस्तुओं को छिपाता है। इसका दक्षिणी सिरा Vela महा-आकाशगंगा समूह के निकट भी है। इस अध्ययन की जोड़ने की सीमा के अनुसार दोनों अलग रहते हैं। भविष्य के सर्वेक्षण बताएँगे कि आकाशगंगा की डिस्क के पीछे अतिरिक्त सदस्य छिपे हैं या नहीं; नए आँकड़े इस डोर की ज्ञात आकृति को आगे बढ़ा सकते हैं।

महा-संरचनाएँ भी समय के साथ बदलती हैं। लेखकों का अनुमान है कि आगे चलकर वे कई ऐसी इकाइयों में अलग हो जाएँगी जो अपने-अपने स्तर पर गुरुत्वीय संकुचन करेंगी। आज दिखने वाली लंबी डोर ब्रह्मांडीय जाल के विकास की एक अवस्था है। इसका मानचित्र समझने में मदद करता है कि निकट का पदार्थ आकाशगंगाओं को कैसे आकार देता है और दूर के ब्रह्मांड के मापों को कैसे प्रभावित करता है।