लगभग 7,500 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित Pa 30, वर्ष 1181 में दिखे अतिथि तारे का अवशेष होने का प्रमुख उम्मीदवार है। नई तस्वीरों में आतिशबाज़ी जैसे उसके तंतु गैस की गांठों की लड़ियों के रूप में दिखाई देते हैं। इससे पता लगाने में मदद मिलती है कि इस दुर्लभ विस्फोट के बाद एक तारा कैसे बचा और आसपास का पदार्थ कैसे आकार ले सका।
मुख्य बातें
- नई तस्वीरों में पहले से लगभग दस गुना अधिक तंतु पहचाने गए हैं, जिनके भीतर गैस की गांठों की लड़ियां दिखाई देती हैं।
- गांठों का प्रतिनिधि आकार लगभग 10¹⁶ सेंटीमीटर है। वे छवि की विभेदन सीमा के पास हैं, इसलिए उनके आकार अभी अनुमान हैं।
- केंद्रीय तारे की अनुप्रस्थ प्रतिक्षेप गति की 3σ ऊपरी सीमा 14 km/s है; त्रिविमीय सीमा दिशा संबंधी मान्यता पर भी निर्भर करती है।
Pa 30 नीहारिका से बाहर की ओर फैलते तंतुओं में अब मोतियों की लड़ियों जैसे बारीक विवरण दिख रहे हैं। Tim Cunningham और Ilaria Caiazzo के संयुक्त नेतृत्व वाले दल ने हवाई स्थित जेमिनी नॉर्थ दूरबीन के GMOS उपकरण से गहरी संकीर्ण-बैंड तस्वीरें लीं। पहले चिकनी दिखाई देने वाली रेडियल चमकीली धारियों में गैस की गांठों की श्रृंखलाएं मिलीं।
1181 के अतिथि तारे के सुराग
पृथ्वी से लगभग 7,500 प्रकाश-वर्ष दूर Pa 30 की खोज 2013 में हुई, जब शौकिया खगोलविद Dana Patchick ने इसे WISE के अवरक्त आंकड़ों में पहचाना। यह ऐतिहासिक अतिथि तारे SN 1181 का अवशेष होने का प्रमुख उम्मीदवार है। उस घटना का उल्लेख चीनी, जापानी और अरबी अभिलेखों में मिलता है।
2023 के एक अध्ययन में बाहर की ओर फैलते दर्जनों तंतु दिख चुके थे। 2024 की स्पेक्ट्रोस्कोपी में उत्सर्जित पदार्थ की गतियां मोटे तौर पर मुक्त विस्तार के अनुरूप मिलीं, जिससे SN 1181 से संबंध को बल मिला। केंद्रीय तारे का बचा रहना और उत्सर्जित पदार्थ में हाइड्रोजन तथा हीलियम का अभाव इस व्याख्या का आधार बने कि यह अपेक्षाकृत मंद प्रकार Iax ताप-नाभिकीय सुपरनोवा का अवशेष है, जिसने पीछे एक तारा छोड़ दिया।
तंतुओं में गैस की गांठें
नए अवलोकन एक बार आयनित सल्फर, [S II], और दो बार आयनित ऑक्सीजन, [O III], के उत्सर्जन को मापते हैं। सल्फर की तस्वीरों में पहले से लगभग दस गुना अधिक तंतु पहचाने गए। ऑक्सीजन की तस्वीरों में भी वही संरचनाएं दिखती हैं, जिससे पहले अधिक धुंधले दिखने वाले ऑक्सीजन उत्सर्जन का स्पष्ट संरचनात्मक संबंध स्थापित होता है।
गांठों का प्रतिनिधि व्यास लगभग 10¹⁶ सेंटीमीटर, यानी करीब 670 खगोलीय इकाई है। यह नेपच्यून की कक्षा के व्यास का लगभग ग्यारह गुना है। हालांकि, वायुमंडलीय धुंधलेपन के मुकाबले वे मुश्किल से अलग पहचानी जा सकती हैं, इसलिए आकार प्रारंभिक अनुमान हैं। तंतुओं के साथ उनकी लगभग समान दिखने वाली दूरी भी दृष्टि की दिशा में संरचनाओं के एक-दूसरे पर चढ़ने से प्रभावित हो सकती है।
तंतु केंद्रीय तारे की ओर संकेत करते हैं
दल ने रोलिंग हफ़ ट्रांसफ़ॉर्म से तंतुओं की दिशाएं मापकर वह साझा नीहारिका केंद्र निकाला, जिसकी ओर वे संकेत करते हैं। यह स्थान केंद्रीय तारे IRAS 00500+6713 के अनुरूप है। इससे उस प्रतिक्षेप की सीमा तय होती है, जो विस्फोट के दौरान तारे को केंद्र से दूर धकेल सकता था।
आकाश के तल में अनुप्रस्थ प्रतिक्षेप गति की 3σ ऊपरी सीमा 14 km/s है। यदि त्रिविमीय अंतरिक्ष में प्रतिक्षेप की सभी दिशाओं को समान रूप से संभावित माना जाए, तो कुल गति की 3σ ऊपरी सीमा 94 km/s मिलती है। यह दूसरी सांख्यिकीय सीमा दिशा संबंधी मान्यता पर निर्भर है; दृष्टि-रेखा के साथ तारे की गति सीधे मापना अभी कठिन है।
गांठों की लड़ियां कैसे बनीं?
गांठें तंतुओं के निर्माण वाले मॉडलों के सामने एक अतिरिक्त मांग रखती हैं: उन्हें पतली रेडियल संरचनाओं और उनके भीतर गैस के जमाव, दोनों को समझाना होगा। शोधपत्र प्रवाह की गति में अंतर से पैदा होने वाली अस्थिरताओं और गैस के तेज़ी से ठंडा होने की तापीय अस्थिरता पर चर्चा करता है। ये प्रक्रियाएं मिलकर गांठें बना सकती हैं; सटीक तंत्र अभी तय होना बाकी है।
Pa 30 अपेक्षाकृत पास से प्रकार Iax अवशेष का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर देता है। दल को उम्मीद है कि इसकी अनोखी आकृति आकाशगंगा और पड़ोसी आकाशगंगाओं में ऐसे अन्य तंत्र खोजने में मदद करेगी। इस तरह प्राचीन विस्फोट के सुराग दूसरे तारों के अंत को समझने तक पहुंच सकते हैं।