क्यूरियोसिटी ने माउंट शार्प पर हवा से तराशी गई चट्टानों को सुबह की रोशनी में कैद किया है। सामने नीले-धूसर रंग हैं और दूर की धारियाँ रोशन हैं। छह तस्वीरों से बना पैनोरमा यारडांग परत को अधिक स्पष्ट दिखाता है। टीम को उम्मीद है कि 2027 में उसके आधार तक पहुँचकर उसकी उत्पत्ति की जाँच की जा सकेगी।
मुख्य बातें
- क्यूरियोसिटी ने यह दृश्य 11 अगस्त 2026 को, मिशन के 4,982वें सोल पर, मंगल के स्थानीय समयानुसार सुबह 8:30 बजे लिया।
- Mastcam की छह तस्वीरें पृथ्वी पर जोड़ी गईं। सामान्य श्वेत-संतुलन समायोजन के बिना सुबह के रंग बरकरार रखे गए।
- यारडांग परत लगभग 16 किलोमीटर तक फैली है। प्राचीन ज्वालामुखीय राख उसकी एक संभावित उत्पत्ति है; टीम को 2027 में पास से जाँच की उम्मीद है।
मंगल के माउंट शार्प पर सुबह की रोशनी पड़ती है। दूर की नुकीली चट्टानें रोशन हो रही हैं, जबकि सामने का भूभाग नीले-धूसर रंगों में है। NASA ने क्यूरियोसिटी का यह नया पैनोरमा 6 अक्टूबर 2026 को जारी किया। तस्वीर हवा से तराशे इस भू-दृश्य की रूपरेखा अधिक स्पष्ट करती है और मिशन के अगले महत्वपूर्ण लक्ष्य की झलक देती है।
छह तस्वीरों में सुबह के रंग
क्यूरियोसिटी के मस्तूल पर लगे कैमरे Mastcam ने यह दृश्य 11 अगस्त को लिया। वह मिशन का 4,982वाँ मंगल दिवस, यानी सोल था। मंगल के स्थानीय समय के अनुसार सुबह के 8:30 बजे थे। छह तस्वीरें पृथ्वी पर भेजी गईं और फिर जोड़कर यह चौड़ा पैनोरमा बनाया गया।
सुबह का रूप बनाए रखने के लिए तस्वीरों के प्रसंस्करण में वह सामान्य श्वेत-संतुलन समायोजन जानबूझकर नहीं किया गया जो कई Mastcam तस्वीरों पर लागू होता है। सामने के ठंडे रंग दूर की धूप में चमकती चट्टानी धारियों से अलग दिखते हैं। उस समय की रोशनी और प्रसंस्करण के विकल्प, दोनों इन रंगों को प्रभावित करते हैं।
हवा से तराशी चट्टानें, अनसुलझा इतिहास
यारडांग परत माउंट शार्प के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में लगभग 16 किलोमीटर तक फैली है। यारडांग हवा के कटाव से बनी चट्टानी धारियाँ हैं। उनकी खुरदरी आकृति कैसे बनी और उन्हें बनाने वाला पदार्थ शुरू में कैसे जमा हुआ, ये भूविज्ञान के दो जुड़े हुए सवाल हैं।
माउंट शार्प लगभग 5 किलोमीटर ऊँचा है। उसकी चट्टानी परतें मंगल के पर्यावरणीय इतिहास के अलग-अलग दौर दर्ज करती हैं। क्यूरियोसिटी को इनमें प्राचीन झीलों और जलधाराओं के प्रमाण मिले हैं। वातावरण अधिक शुष्क होने पर पानी पीछे हटा और लवणीय खनिज छोड़ गया। बाद में हवा के कटाव ने कुछ पदार्थ हटाकर आज का भू-दृश्य बनाने में भूमिका निभाई हो सकती है।
यारडांग परत खास है, क्योंकि उसका रंग और उसकी परतों का झुकाव आसपास की चट्टानों से अलग है। मिशन के वैज्ञानिकों के अनुसार प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों की राख उसकी एक संभावित उत्पत्ति है। आधिकारिक चित्र-विवरण में यह भी कहा गया है कि इस परत के जमा होने से पहले माउंट शार्प पर कटाव हुआ हो सकता है, जिससे चट्टानी रिकॉर्ड में एक अंतराल रह गया। इन व्याख्याओं की पुष्टि के लिए पास से जाँच आवश्यक है।
अगला कदम: यारडांग परत के और करीब
क्यूरियोसिटी 2014 से माउंट शार्प पर चढ़ रहा है। 26 अगस्त 2026 को वह गेल क्रेटर के तल के मुकाबले लगभग 1 किलोमीटर की ऊँचाई हासिल कर चुका था। यह आँकड़ा पहाड़ की ढलानों पर उसकी चढ़ाई की प्रगति बताता है।
JPL की मिशन योजना के अनुसार, आने वाले लगभग एक वर्ष में क्यूरियोसिटी मुख्यतः सल्फेट और कार्बोनेट से समृद्ध परतों से गुजरेगा और प्राचीन सतह के सूखने के और संकेत तलाशेगा। टीम को उम्मीद है कि 2027 में यारडांग के आधार तक पहुँचकर रोबोटिक भुजा से नजदीकी आँकड़े जुटाए जा सकेंगे। सुबह का यह पैनोरमा मंगल का सुंदर दृश्य दिखाता है और उसके भूवैज्ञानिक इतिहास के एक ऐसे अध्याय की ओर इशारा करता है जिसे अभी पढ़ना बाकी है।