Icarus में प्रकाशित एक अध्ययन ने New Horizons की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरों और स्थलाकृतिक डेटा का दोबारा विश्लेषण करके प्लूटो के तीन प्रभाव क्रेटरों में छह विशाल भूस्खलनों की पहचान की। ये भू-आकृतियाँ दिखाती हैं कि गुरुत्व-प्रेरित ढाल गतियों ने प्लूटो की सतह को आकार दिया, हालांकि उपलब्ध डेटा यह नहीं बताते कि वे कब हुईं।
मुख्य बातें
- शोधकर्ताओं ने Sputnik Planitia के पास तीन प्रभाव क्रेटरों की भीतरी दीवारों पर LD1 से LD6 नाम के छह विशाल भूस्खलनों की पहचान की।
- इन भूस्खलनों का ऊर्ध्वाधर अंतर लगभग 1.5 से 2.2 किलोमीटर, फैलाव लगभग 10.1 से 14.5 किलोमीटर और मानचित्रित क्षेत्रफल लगभग 130 वर्ग किलोमीटर तक है।
- उनकी ज्यामिति उच्च गतिशीलता दिखाती है, जिसकी तुलना मंगल और सीरीस के कुछ लंबी दूरी वाले भूस्खलनों से की जा सकती है; यह अनुपात समग्र गतिशीलता का संकेतक है, सीधे मापा गया पदार्थ का घर्षण गुणांक नहीं।
- Coughlin क्रेटर के पास एक छोटा और अपेक्षाकृत नया प्रभाव क्रेटर LD1 को प्रेरित कर सकता है; बाकी पाँच भूस्खलनों के कारण अब भी अनिश्चित हैं।
- तस्वीरें घटनाओं के बाद बनी भू-आकृतियाँ दिखाती हैं, पर विश्वसनीय आयु नहीं देतीं; इसलिए यह खोज नहीं दिखाती कि प्लूटो पर आज भूस्खलन हो रहे हैं।
New Horizons ने जुलाई 2015 में प्लूटो के पास से केवल एक बार उड़ान भरी थी, फिर भी उस समय मिली तस्वीरें आज भी नए शोध का आधार बन रही हैं। Marco Emanuele Discenza और चार सहलेखकों ने इन डेटा की दोबारा जाँच करके पहली बार प्लूटो पर छह विशाल भूस्खलनों की स्पष्ट पहचान की। ग्रह विज्ञान की पत्रिका Icarus में प्रकाशित यह नतीजा प्रत्यक्ष भू-आकृतिक प्रमाण देता है कि गुरुत्व-प्रेरित ढाल गतियों ने इस बौने ग्रह को आकार देने में भूमिका निभाई।
पुरानी तस्वीरों से छह भूस्खलन कैसे सामने आए?
टीम ने New Horizons के Long Range Reconnaissance Imager (LORRI) से ली गई लगभग 300 मीटर प्रति पिक्सेल रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों को स्थलाकृतिक डेटा के साथ दोबारा विश्लेषित किया। LD1 से LD6 नाम की सभी छह भू-आकृतियाँ Sputnik Planitia के पास तीन प्रभाव क्रेटरों की भीतरी दीवारों पर हैं: LD1 Coughlin क्रेटर में, LD2 और LD3 Giclas क्रेटर में, तथा LD4 से LD6 एक अन्य अनाम क्रेटर में हैं।
शोधकर्ताओं ने भूस्खलनों को चलते हुए नहीं देखा। उन्होंने उनके छोड़े हुए कई संकेतों का मेल पहचाना: ढाल के ऊपरी भाग पर धनुषाकार टूटन-किनारे, मूल जगह से हटे बड़े खंड और क्रेटर के तल की ओर फैले जीभ जैसे या ऊबड़-खाबड़ निक्षेप। किसी एक संकेत की दूसरी व्याख्या हो सकती है; कई संकेतों का साथ मिलना ही इन छह को स्पष्ट उदाहरण मानने का आधार बना। कुछ अन्य संभावित भू-आकृतियों को अपर्याप्त तस्वीरों या स्थलाकृतिक डेटा के कारण औपचारिक सूची में शामिल नहीं किया गया।
लगभग 130 वर्ग किलोमीटर तक: ये इतनी दूर कैसे पहुँचे?
अध्ययन में ऊर्ध्वाधर अंतर लगभग 1.5 से 2.2 किलोमीटर और ऊपरी टूटन-किनारे से निक्षेप के अंतिम सिरे तक फैलाव लगभग 10.1 से 14.5 किलोमीटर मापा गया। सबसे बड़ा मानचित्रित क्षेत्र लगभग 130 वर्ग किलोमीटर है। ये आँकड़े तस्वीरों में पहचानी गई भू-आकृतियों का विस्तार बताते हैं; वे खिसके हुए पदार्थ का आयतन नहीं हैं और केवल क्षेत्रफल से घटना की ऊर्जा तय नहीं की जा सकती।
शोधकर्ताओं ने ऊर्ध्वाधर अंतर H को क्षैतिज फैलाव L से भाग देकर लगभग 0.13 से 0.17 के H/L अनुपात पाए। कम मान सामान्यतः बताता है कि समान ऊँचाई अंतर में पदार्थ अधिक दूर गया, इसलिए प्लूटो के उदाहरणों की तुलना मंगल और सीरीस के अत्यधिक गतिशील भूस्खलनों से की जा सकती है। लेकिन H/L भू-आकृति से निकला समग्र गतिशीलता का संकेतक है, बर्फीले खंडों या मलबे का प्रयोगशाला में सीधे मापा गया घर्षण गुणांक नहीं। कम गुरुत्व, पदार्थ के गुण, आधार की दशाएँ और गति का तरीका मिलकर परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
एक भूस्खलन को प्रभाव ने प्रेरित किया होगा; बाकी कारण अनिश्चित हैं
LD1 का आरंभिक बिंदु Coughlin क्रेटर के किनारे स्थित एक छोटे और अपेक्षाकृत नए प्रभाव क्रेटर के पास है। छोटे क्रेटर को बनाने वाले प्रभाव ने ढाल को अस्थिर किया होगा या पहले से अस्थिर पदार्थ को कंपन से गिराया होगा, इसलिए यह अब तक प्रस्तावित सबसे ठोस प्रेरक व्याख्या है। फिर भी तस्वीरें केवल घटनाओं के क्रम का संकेत देती हैं; वे प्रभाव को सीधे भूस्खलन शुरू करते हुए नहीं दिखातीं।
LD2 से LD6 के लिए उपलब्ध डेटा किसी एक कारण की पहचान नहीं करते। अध्ययन में प्रभाव, विवर्तनिक विकृति, ढाल से भार हटना, क्रायोज्वालामुखीय गतिविधि और तापमान परिवर्तन जैसी संभावनाएँ बताई गई हैं। प्लूटो की सतह पर नाइट्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड की बर्फ तापमान बदलने पर उर्ध्वपातित या संघनित होती है और सिद्धांततः सतह के पास के पदार्थ के यांत्रिक गुण बदल सकती है; भूमिगत वाष्पशील पदार्थ कमजोर परतें भी बना सकते हैं। ये भू-आकृतियों की संभावित व्याख्याएँ हैं, प्रत्यक्ष रूप से देखे और पुष्ट कारण नहीं।
छह भूस्खलन प्लूटो की सतही विकास-यात्रा के नए संकेत देते हैं
अध्ययन पहली बार इन छह भू-आकृतियों को भूस्खलन निक्षेप के रूप में पहचानता है और दिखाता है कि गुरुत्व-प्रेरित ढाल प्रक्रियाओं ने प्लूटो को आकार दिया। 2015 के फ्लाइबाई में मिला उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा सतह के केवल एक हिस्से को ढकता है और इन भूस्खलनों के बनने की आयु अभी तय नहीं की जा सकती। इसलिए ये छह अभी तक पुष्ट नमूने हैं और संभव है कि प्लूटो पर भूस्खलनों के पूरे वितरण का केवल एक हिस्सा हों।
उनका आकार, ऊँचाई अंतर और फैलाव शोधकर्ताओं को प्लूटो की बर्फीली सतह के यांत्रिक गुणों का अप्रत्यक्ष अध्ययन करने देते हैं और सौरमंडल में भूस्खलनों की तुलनात्मक खोज को मंगल, सीरीस तथा प्लूटो के सबसे बड़े चंद्रमा कैरन से स्वयं प्लूटो तक बढ़ाते हैं। आगे के विश्लेषण में नए संभावित उदाहरण खोजे जा सकते हैं और प्रभावों, विवर्तनिक गतिविधि तथा वाष्पशील बर्फ में बदलाव से उनके संबंधों की तुलना की जा सकती है। आयु और विकास क्रम स्थापित करने के लिए अधिक पूर्ण तस्वीरों की जरूरत होगी और अंततः शायद किसी अन्य निकटवर्ती मिशन की भी।