NASA के Scientific Visualization Studio ने जुलाई 2026 में GOCO06s वैश्विक गुरुत्व मॉडल पर आधारित जियोइड दृश्य जारी किया। आइसलैंड के पास लगभग +85 मीटर से दक्षिणी भारत के पास −106 मीटर तक की ऊँचाइयों को 10,000 गुना बढ़ाकर दिखाया गया, इसलिए आकृति आलू जैसी लगती है। यह गुरुत्व की समविभव सतह का मानचित्र है, पृथ्वी की वास्तविक आकृति या स्थलाकृतिक नक्शा नहीं।

मुख्य बातें

  • NASA ने गुरुत्व क्षेत्र का वैज्ञानिक दृश्य जारी किया है; इसकी बाहरी रेखा पृथ्वी की वास्तविक सतह या स्थलाकृति नहीं दिखाती।
  • जियोइड वह गुरुत्व समविभव सतह है जो वैश्विक औसत समुद्र-तल से सबसे अच्छी तरह मेल खाती है। इसे ज्वार, लहर और धाराओं से मुक्त, केवल गुरुत्व व घूर्णन से आकार पाए स्थिर महासागर की सतह मान सकते हैं, जो महाद्वीपों के भीतर भी जारी रहती है।
  • NASA के दृश्य में जियोइड ऊँचाई आइसलैंड के पास लगभग +85 मीटर से दक्षिणी भारत के पास −106 मीटर तक है, यानी कुल अंतर लगभग 191 मीटर।
  • दृश्य में इन ऊँचाई भिन्नताओं को 10,000 गुना बढ़ाया गया है। वास्तविक पैमाने पर उभार लगभग दिखाई नहीं देते।
  • GOCO06s मॉडल में 15 वर्षों के दौरान 19 उपग्रहों से मिले 1.16 अरब से अधिक अवलोकन शामिल हैं, जिनमें NASA का GRACE और ESA का GOCE भी है।

सोशल मीडिया पर घूम रही रंगीन “आलू जैसी पृथ्वी” की मूल छवि NASA के Scientific Visualization Studio की है। NASA के Goddard Space Flight Center स्थित इस स्टूडियो ने 15 जुलाई 2026 को The Geoid जारी किया और वैश्विक गुरुत्व मॉडल को घुमाए जा सकने वाले त्रि-आयामी जियोइड में बदला। इसमें दिखने वाला उतार-चढ़ाव गुरुत्व समविभव सतह का है, वास्तविक पैमाने पर बने पहाड़ों, महासागरीय गर्तों या भूपर्पटी का नहीं।

छवि वास्तव में क्या दिखाती है?

जियोइड पृथ्वी के गुरुत्व क्षेत्र की एक समविभव सतह है। कल्पना कीजिए कि समुद्र पूरे ग्रह को ढक ले और ज्वार, लहर, हवा तथा धाराओं के प्रभाव हटा दिए जाएँ: गुरुत्व और घूर्णन के तहत पानी जिस सतह पर स्थिर होगा, वही जियोइड है। यह महाद्वीपों के भीतर भी जारी रहता है और ऊँचाई प्रणालियों के लिए वैश्विक औसत समुद्र-तल के सबसे निकट भौतिक संदर्भ देता है। एक ही समविभव सतह पर आदर्श रूप से ऐसा विभव-अंतर नहीं होगा जो पानी को किसी एक दिशा में बहाए।

पृथ्वी का कटाव दृश्य चिकने संदर्भ दीर्घवृत्तज, धीरे-धीरे लहराते जियोइड और स्थल व समुद्र-तल के उभार वाली स्थलाकृतिक सतह को अलग दिखाता है
संदर्भ दीर्घवृत्तज गणितीय निर्देशांक सतह है, जियोइड गुरुत्व समविभव सतह है और केवल स्थलाकृतिक सतह में पर्वत, भूमि और समुद्र-तल आते हैं। ये अलग संदर्भ सतहें हैं और सभी को पृथ्वी की वास्तविक रूपरेखा नहीं माना जा सकता।

पृथ्वी की “आकृति” से जुड़े तीन विचार अक्सर मिलाए जाते हैं। संदर्भ दीर्घवृत्तज निर्देशांकों के लिए प्रयुक्त चिकना गणितीय मॉडल है; स्थलाकृतिक सतह में पर्वत, मैदान और समुद्र-तल आते हैं; जियोइड गुरुत्व विभव से तय होता है। पृथ्वी के भीतर और सतह पर द्रव्यमान का असमान वितरण तथा घूर्णन अलग-अलग स्थानों पर गुरुत्व बदलते हैं, इसलिए यह आदर्श स्थिर समुद्री सतह संदर्भ दीर्घवृत्तज के सापेक्ष धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होती है।

सबसे ऊँचे और सबसे नीचे बिंदु में केवल लगभग 191 मीटर का अंतर

NASA के अनुसार GOCO06s जियोइड ऊँचाई आइसलैंड के पास लगभग +85 मीटर से दक्षिणी भारत के पास −106 मीटर तक है। धन और ऋण चिह्न बताते हैं कि जियोइड संदर्भ दीर्घवृत्तज के ऊपर है या नीचे; वे स्थानीय समुद्र-तल ऊँचाई नहीं हैं। कुल 191 मीटर का अंतर पृथ्वी के 6,371 किलोमीटर औसत त्रिज्या का केवल लगभग 0.003% है। पूरे ग्रह को वास्तविक पैमाने पर बनाएँ तो बाहरी रेखा बहुत चिकनी रहेगी।

एक ही जियोइड वास्तविक पैमाने और 10,000 गुना ऊर्ध्वाधर बढ़ोतरी के साथ साथ दिखाया गया है; पहला चिकना और दूसरा स्पष्ट रूप से ऊबड़-खाबड़ है
वैश्विक जियोइड के सबसे ऊँचे और सबसे नीचे बिंदु में लगभग 191 मीटर का अंतर है, जो पृथ्वी की औसत त्रिज्या का केवल करीब 0.003% है। 10,000 गुना ऊर्ध्वाधर बढ़ोतरी इस छोटे अंतर को दिखाती है।

अंतर को दिखाई देने योग्य बनाने के लिए NASA ने त्रिज्यीय बदलाव को 10,000 गुना बढ़ाया। केवल ज्यामितीय अनुपात से देखें तो मूल 191 मीटर का अंतर दृश्य में लगभग 1,910 किलोमीटर जैसा बनता है, इसलिए बड़े उभार दिखते हैं। रंग भी जियोइड ऊँचाई को कूटबद्ध करते हैं; वे चट्टान की संरचना, तापमान या गुरुत्व की दिशा नहीं बताते।

पृथ्वी स्वयं गोले के कितनी करीब है?

पृथ्वी के घूर्णन से भूमध्य रेखा उभरती और ध्रुव थोड़े चपटे होते हैं। NASA Goddard के अनुसार भूमध्य त्रिज्या लगभग 6,378 किलोमीटर और ध्रुवीय त्रिज्या लगभग 6,357 किलोमीटर है, यानी करीब 21 किलोमीटर का अंतर। यह चपटा आकार और संदर्भ दीर्घवृत्तज के सापेक्ष जियोइड के कुछ सौ मीटर के बदलाव अलग-अलग पैमानों की विशेषताएँ हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी की रूपरेखा लगभग गोल दिखती है, फिर भी वैज्ञानिक मॉडल इन सूक्ष्म अंतरों को शामिल करते हैं।

GOCO06s वैश्विक गुरुत्व क्षेत्र कैसे बनाता है?

यह दृश्य GOCO06s के मानों पर आधारित है। GOCO दल ने 15 वर्षों में 19 उपग्रहों से मिले 1.16 अरब से अधिक अवलोकनों को मिलाकर गोलकीय हार्मोनिक डिग्री 300 तक का वैश्विक गुरुत्व मॉडल बनाया। इसमें GRACE के जुड़वाँ उपग्रहों की बदलती दूरी, GOCE के गुरुत्व-प्रवणता माप, उपग्रह लेज़र रेंजिंग और कई निम्न-पृथ्वी-कक्षा उपग्रहों की सटीक कक्षाएँ शामिल हैं। अलग तकनीकें अलग स्थानिक पैमानों के लिए अधिक संवेदनशील हैं, इसलिए संयुक्त समाधान उनकी सीमाओं की भरपाई करता है।

इसलिए NASA की छवि अंशांकन, पृष्ठभूमि मॉडलिंग, कक्षा विश्लेषण, सांख्यिकीय भारांकन और गोलकीय हार्मोनिक विस्तार के बाद मिला मॉडल परिणाम है। इसकी रूपरेखा आँकड़ों से गणना और दृश्यीकृत की गई है; इसे कैमरे से सीधे दर्ज क्षणिक दृश्य नहीं मानना चाहिए। GOCO06s में दीर्घकालीन रुझान और वार्षिक परिवर्तन पद भी हैं। हर मॉडल की तरह इसकी स्थानिक विभेदन क्षमता सीमित है और इसमें अवलोकन त्रुटियाँ व प्रसंस्करण मान्यताएँ हैं; इसलिए हर छोटे उभार को किसी खास पर्वत या एक भूमिगत संरचना से नहीं जोड़ा जा सकता।

जियोइड का व्यावहारिक उपयोग क्या है?

उपग्रह स्थिति-निर्धारण सामान्यतः संदर्भ दीर्घवृत्तज के सापेक्ष ज्यामितीय ऊँचाई देता है, जबकि इंजीनियरिंग, सर्वेक्षण और मानचित्रण को अक्सर समुद्र-तल से ऊँचाई के करीब ऑर्थोमेट्रिक ऊँचाई चाहिए। जियोइड मॉडल दोनों में परिवर्तन करने देता है। यह समुद्र-सतह ऊँचाई के अंतर, वैश्विक महासागरीय परिसंचरण, समुद्र-स्तर परिवर्तन और हिमचादर द्रव्यमान के अध्ययन का भी महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि हवा, तापमान, लवणता और धाराओं से बनी गतिशील ऊँचाई अलग करने से पहले गुरुत्व समविभव सतह हटानी पड़ती है।

इस छवि की सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि “पृथ्वी सचमुच आलू जैसी है”, बल्कि यह है कि उसके गुरुत्व क्षेत्र में छोटे, मापने योग्य क्षेत्रीय अंतर हैं। NASA की 10,000 गुना ऊर्ध्वाधर बढ़ोतरी सूक्ष्म मानों को पढ़ने योग्य आकृति में बदलती है। वास्तविक सतह, स्थलाकृति, संदर्भ दीर्घवृत्तज और जियोइड को अलग-अलग समझें तो छवि रहस्यमय नहीं रहती।